Tuesday, November 26, 2013

ख्वाबों के साहारे ही सही

ख्वाबों के साहारे ही सही,
चले थे हम...
दो-चार कदम...
तेरे साथ...तेरे साथ...तेरे साथ.

सपना टूटा और खुली आँख,
मैं...मैं न रही...
और ना आया कोई...
तेरे बाद...तेरे बाद...तेरे बाद.

तू था तो हर कदम में थी ज़िन्दगी,
मंज़िल की मुझको थी नहीं तालाश।
तू नहीं तो...ज़िन्दगी ही बन बन गई है सवाल,
ढूँढ़ती रहती है नज़रें पर मिलता नहीं ...
कोई जवाब...हाँ कोई जवाब.

ख्वाबों के साहारे ही सही,
चले थे हमi...
दो-चार कदम...
तेरे साथ...तेरे साथ...तेरे साथ.

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