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Anjay
Thursday, August 13, 2009
मेरी कविता...
तुम्हे सोचता हूँ और
उँगलियाँ मदहोशी में कुछ लिख जाती हैं...
होश में जब आता हूँ तो वो चन्द शब्द
कविता नज़र आती हैं।
ये मैं नहीं जो लिखता हूँ...
ये तुम्हारी चाहत है...
जो मुझसे ब्यान करवाती हैं.
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तरंग
रफ़्तार
फासले....
कुछ दूर हमारे साथ चलो...
नदी के बहाव को मोड़ने चला था मैं...कुछ अलग करने की...
हमसफ़र...
तुम मेरी तालाश हो...
मेरी कविता...
आइना तस्वीर क्यूँ नही...
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Anjay
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