Thursday, August 13, 2009

हमसफ़र...

इस उम्मीद से जीए जा रहा हूँ...
एक दिन ज़िन्दगी आएगी कभी।
दस्तक देगी मेरे दिल क दरवाजे को
मुझसे कहेगी ये ज़िन्दगी...
क्या मैं बन सकती हूँ तुम्हारी
हमसफ़र...

1 comment:

  1. बोहोत खूब .....

    ऐसा ही एक वादा ज़िन्दगी ने मुझसे भी किया था ... हम भी इसी गाफिली में जीते रहे ....

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